February 4, 2026

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बिहार में सियासी रण शुरू — नामांकन के साथ ही एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने-सामने, सीटों पर शुरू हुआ शह-मात का खेल

बिहार में सियासी रण शुरू — नामांकन के साथ ही एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने-सामने, सीटों पर शुरू हुआ शह-मात का खेल

       पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के बाद राज्य की सियासत में जबरदस्त गर्माहट देखने को मिल रही है। नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी होते ही अब मुकाबला स्पष्ट हो चुका है — एक तरफ एनडीए (NDA) संगठित मोर्चा बनाकर मैदान में उतर चुका है, तो दूसरी ओर इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) अभी भी तालमेल और टिकट बंटवारे की पेचीदगियों में उलझा दिख रहा है।

एनडीए: संगठित मोर्चा, मोदी की 12 मेगा रैलियों से चुनावी बिगुल

       एनडीए ने 243 में से सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर, लोजपा (रामविलास) 29 सीटों पर, जबकि जीतनराम मांझी की ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘आरएलएम’ 6-6 सीटों पर मैदान में हैं।

       हालांकि, गठबंधन में शुरुआती दौर में सीट बंटवारे को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जदयू के बीच तनातनी रही। चिराग पासवान ने 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन अंततः 29 पर समझौता हुआ। भाजपा के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा और अब एनडीए एकजुट मोड में दिख रहा है।

       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर से बिहार में 12 रैलियों की श्रृंखला शुरू करने जा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी संयुक्त सभाओं में शामिल होंगे। पार्टी का फोकस “बूथ-टू-वोटर” रणनीति और डिजिटल प्रचार पर है।

इंडिया गठबंधन: अंदरूनी उलझनों से घिरा, कई सीटों पर ‘फ्रेंडली कॉन्टेस्ट’

       महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर असंतोष अब भी थमा नहीं है। आरजेडी को 143, कांग्रेस को 61 और भाकपा (माले) को 20 सीटें मिली हैं। वहीं, वीआईपी और झामुमो जैसे सहयोगी दलों ने अलग राह पकड़ ली है।

       वैशाली, तारापुर और कुटुंबा जैसी सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन की एकता पर सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी यादव लगातार रैलियों में जातीय जनगणना, रोजगार और सामाजिक न्याय को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं, जबकि कांग्रेस ग्रामीण और अल्पसंख्यक इलाकों पर फोकस कर रही है।

आम आदमी पार्टी: पहली बार पूरे दमखम के साथ मैदान में

       आम आदमी पार्टी (AAP) ने बिहार में 132 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, मनीष सिसोदिया, आतिशी और संजय सिंह जैसे स्टार प्रचारक राज्यभर में जनसभाएँ करेंगे। पार्टी अपने दिल्ली-पंजाब मॉडल को बिहार में पेश कर रही है, हालांकि स्थानीय प्रभाव फिलहाल सीमित है।

नामांकन और स्क्रूटनी के बाद की तस्वीर

       नामांकन और स्क्रूटनी के बाद राज्य में लगभग 1200 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। कुछ नामांकन रद्द भी हुए हैं — विशेषकर एनडीए को मारहौरा सीट पर झटका लगा, जहाँ लोजपा (आरवी) प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन रद्द कर दिया गया।

       दोनों गठबंधन अब पूर्ण रूप से चुनावी मोड में हैं। दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी।

अंतिम विश्लेषण

       राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की सियासत इस बार “स्थिरता बनाम बदलाव” के एजेंडे पर खड़ी है।

  • एनडीए अपने “विकास और स्थिर सरकार” के नैरेटिव के साथ मैदान में है।

  • महागठबंधन “सामाजिक न्याय, रोजगार और आरक्षण” के मुद्दे पर जनभावना को लामबंद करने की कोशिश में है।

       जातीय समीकरण, युवा मतदाताओं की भूमिका और छोटे दलों का प्रदर्शन — यही तय करेगा कि पटना की गद्दी पर 2025 में कौन बैठेगा।