October 14, 2026

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छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा गरमाया, 9,392 पद रिक्त होने का दावा

छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा गरमाया, 9,392 पद रिक्त होने का दावा

विशेषज्ञ चिकित्सकों के करीब 80 प्रतिशत पद खाली होने का आरोप, कांग्रेस ने समयबद्ध भर्ती और जिलेवार रिक्तियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की

       रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने दावा किया है कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के कुल 9,392 पद रिक्त हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार मिलने में परेशानी हो रही है। पार्टी ने सरकार से रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती करने और दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

       प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कई बार दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावे कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के 80 प्रतिशत पद रिक्त होने का दावा

       वंदना राजपूत ने विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों पर आधारित जुलाई 2026 की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के कुल 9,392 पद रिक्त बताए गए हैं। कांग्रेस के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 2,025 पदों के मुकाबले केवल 408 विशेषज्ञ चिकित्सक कार्यरत हैं। पार्टी ने इसे लगभग 80 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बताया है।

       कांग्रेस ने स्टाफ नर्सों के 2,745 पद रिक्त होने का दावा भी किया है। पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता है। हालांकि, ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उद्धृत किए गए हैं; इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।

मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

       कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने पर गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे शहरों में रेफर करना पड़ सकता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर यात्रा, रहने और इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। निजी अस्पतालों में महंगा उपचार हर परिवार की पहुंच में नहीं है, ऐसे में सरकारी अस्पतालों पर निर्भर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

       वंदना राजपूत ने कहा कि समय पर डॉक्टर और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना प्रत्येक मरीज की बुनियादी जरूरत है। यदि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी नहीं होंगे, तो आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने का उद्देश्य प्रभावित होगा।

कांग्रेस ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

       प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार से रिक्त पदों की जिलेवार और पदवार सूची सार्वजनिक करने, विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करने और दूरस्थ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती को प्राथमिकता देने की मांग की है।

       कांग्रेस का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टरों, नर्सों और अन्य जरूरी कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

स्वास्थ्य सेवाओं पर जवाबदेही की मांग

       कांग्रेस ने सरकार से स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल्यांकन केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं तथा मरीजों को मिलने वाले उपचार से होना चाहिए।

       फिलहाल, रिक्त पदों के इन आंकड़ों और कांग्रेस के आरोपों पर राज्य सरकार या स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।