सेवा संकल्प अभियान
236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली से किसानों को मिल रही सिंचाई सुविधा, अल्प वर्षा के दौरान भी खेती के लिए उपलब्ध हुआ पानी
23.81 करोड़ रुपये की लागत से पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण, जल वितरण व्यवस्था हुई बेहतर
खेतों की सिंचाई के साथ अम्बिकापुर शहर की भी बुझा रही प्यास, अमृत योजना के तहत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल की आपूर्ति
रायपुर। खेतों में लहलहाती फसलों के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरत है। जब बारिश कम होती है और खेतों में नमी घटने लगती है, तब सिंचाई के भरोसेमंद साधन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते। सरगुजा जिले की श्याम घुनघुट्टा परियोजना वर्षों से किसानों की इसी जरूरत को पूरा कर रही है। जिले की जीवनदायिनी कही जाने वाली इस परियोजना की 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है। लगभग 35 वर्ष पुरानी नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल वितरण व्यवस्था को मजबूती मिली है। विशेष रूप से अल्प वर्षा के दौरान परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हुई है।
श्याम घुनघुट्टा परियोजना की उपयोगिता केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है। यह अम्बिकापुर शहर की पेयजल आपूर्ति का भी प्रमुख आधार है। एक ओर परियोजना की नहरें ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी को सहारा दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर इससे नगर निगम अम्बिकापुर को अमृत योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है।
35 वर्ष पुरानी नहरों को मिला नया जीवन, 23.81 करोड़ रुपये से हुआ जीर्णोद्धार
जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्याम घुनघुट्टा परियोजना लगभग 35 वर्ष पुरानी है। लंबे समय से संचालित इस परियोजना की नहरों में समय के साथ कई स्थानों पर दरारें पड़ गई थीं। इसके अलावा जलीय जीव-जंतुओं द्वारा बिल बनाए जाने से भी नहरों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या सामने आती थी।
नहरों के क्षतिग्रस्त होने से जल प्रवाह प्रभावित होता था। कई स्थानों पर पानी के रिसाव और नहरों की खराब स्थिति के कारण सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में कठिनाइयां होती थीं। इससे किसानों को आवश्यकतानुसार सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रभावित होती थी।
इन समस्याओं के समाधान के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य की योजना तैयार की गई। इसके अंतर्गत 08 मार्च 2019 को 2381.84 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
स्वीकृत राशि से नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण कराया गया है। इससे पुरानी नहरों की स्थिति में सुधार हुआ है और सिंचाई के लिए जल प्रवाह एवं वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
जब बारिश ने छोड़ा साथ, तब नहरों के पानी ने किसानों को दी राहत
सरगुजा जिले में वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 के दौरान अल्प वर्षा की स्थिति बनी थी। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई थी। खेतों में पानी की कमी से कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।
ऐसे समय में श्याम घुनघुट्टा परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। परियोजना की नहर प्रणाली के माध्यम से जिले के 63 गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को वर्षा की कमी के बावजूद कृषि कार्य जारी रखने में सहायता मिली।
जिन किसानों की खेती वर्षा पर निर्भर रहती है, उनके लिए जरूरत के समय सिंचाई का पानी उपलब्ध होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्याम घुनघुट्टा परियोजना ने अल्प वर्षा की स्थिति में भी खेतों तक पानी पहुंचाकर कृषि गतिविधियों को सहारा देने में अपनी उपयोगिता साबित की है।
236 किलोमीटर की नहर प्रणाली, 63 गांवों की खेती को मिल रहा संबल
श्याम घुनघुट्टा परियोजना के अंतर्गत लगभग 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित है। इस विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से जिले के 63 गांवों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है।
नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल प्रवाह की व्यवस्था में सुधार हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत होने से पानी के वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिली है।

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