August 19, 2026

CHHATTISGARH TIME

ज़रा हटकर, एक नई दृष्टिकोण से देश और दुनिया की सबसे स्वच्छ खबरें

खामोश घाटी में गूंजा विकास, ककनार ने बदली अपनी पहचान

खामोश घाटी में गूंजा विकास, ककनार ने बदली अपनी पहचान

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना से वर्षों से कटे गांव अब विकास की मुख्यधारा में

ककनार घाटी में समावेशी विकास की नई तस्वीर उभर रही है, हर गांव जुड़ रहा है, हर जीवन बदल रहा है – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

       रायपुर। बस्तर की ककनार घाटी, जो कभी वामपंथी उग्रवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अलग-थलग पड़ी थी, आज विकास की नई रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है। यहां बस सेवा की शुरुआत केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने भय और अलगाव को पीछे छोड़कर विश्वास और प्रगति की राह खोली है।

       मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत ककनार घाटी के सुदूर गांव – कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम – अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यह जुड़ाव केवल रास्तों का नहीं, बल्कि अवसरों का है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए द्वार खुले हैं।

       केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा 4 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई यह योजना आज लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का आधार बन चुकी है। एक समय था जब इन गांवों में पक्की सड़क की कल्पना भी असंभव लगती थी। दुर्गम घाटियों और खतरनाक रास्तों के बीच संकरी पगडंडियां ही जीवन का सहारा थीं। लेकिन आज उन्हीं मार्गों पर बसों की आवाजाही एक नए बस्तर की कहानी कह रही है – एक ऐसा बस्तर, जो अब पीछे नहीं, बल्कि आगे बढ़ रहा है।

       योजना के लगभग छह माह पूरे होने पर मुख्यमंत्री साय ने कहा, “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने ककनार घाटी में बदलाव को गति दी है। दूरस्थ गांव अब नियमित रूप से मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। यह परिवर्तन हमारे समावेशी विकास और मजबूत आधारभूत संरचना के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।”

       इस योजना के तहत बस सेवाएं कोंडागांव जिले के मर्दापाल से शुरू होकर घाटी के कठिन मार्गों से गुजरते हुए धरमाबेड़ा, ककनार जैसे गांवों को जोड़ते हुए जगदलपुर तक पहुंच रही हैं। दशकों से परिवहन सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के लिए यह सेवा अब जीवन को आसान और सुलभ बना रही है। यह पहल केवल यात्रा को सरल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और सुरक्षा की नई भावना को भी मजबूत कर रही है। वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिली है। सड़क नेटवर्क के विस्तार से गांवों का अलगाव कम हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा बाजार तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही शासकीय योजनाओं का लाभ अब सीधे घर-घर तक पहुंच रहा है, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

       स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस बदलाव को ऐतिहासिक मानते हैं। चंदेला के सरपंच श्री तुलाराम नाग के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक माओवादी प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित थे, लेकिन अब सड़कों के निर्माण से क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खुला है और आवश्यक सुविधाएं सुलभ हो गई हैं।

       ककनार के सरपंच श्री बलीराम बघेल ने बताया कि पहले लोहण्डीगुड़ा तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब सालभर संपर्क सुनिश्चित हो गया है।

       ककनार के साप्ताहिक हाट-बाजार में लौटी रौनक इस परिवर्तन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।

       यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब सुशासन, सुरक्षा और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी प्रगति की मुख्यधारा में शामिल हो जाते हैं। ककनार घाटी आज उसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।